हमने स्वीकार कर लिया, तुम्हें स्वीकार नही।
अजीब मुक़ाम से गुजरा है क़ाफ़िला ज़िंदगी का ,
उसकी यादों ने हर रात मुझे रोने पर मजबूर कर दी।
वरना ख़ामोशी को लोग अक्सर गलत समझते हैं।
क्योंकि मैंने मान लिया है… शायद गलती मेरी ही थी।
आपकी एक छोटी-सी प्रतिक्रिया हमारे लिए बड़ी प्रेरणा है।
किसने छुप के या खुलेआम किया प्यार नहीं।
अकेलेपन पर शायरी लिखने के लिए अपने दिल की तन्हाई, खामोशी और दर्द को सरल शब्दों में व्यक्त करें।
जख्म का निशा नही है और दर्द का इलाज नहीं…!
क्योंकि उसे पता है— लोग हँसते हैं लड़कियों के दर्द पर भी।
मुझे इसलिए बनाया उस भगवान ने, क्योंकि वो देखना चाहते थे, इंसान किस हद तक दर्द सह सकता है…!
फिर सोचा मैंने Sad Shayari in Hindi उन्हें तड़पाके दर्द मुझको ही होगा,
बड़ी मासूमियत से कहते हैं मजबूर थे हम !!
दिल के ज़ख़्म फिर से ताज़ा हो जाते हैं।